उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni palkon pe kuchh nami le kar

अपनी पलकों पे कुछ नमी ले कर

اپنی پلکوں پہ کچھ نمی لے کر

शायर: Hafeez Betab4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी पलकों पे कुछ नमी ले कर
अब वो आए हैं ज़िंदगी ले कर

रास कुछ आ गया है ग़म इतना
क्या करूँगा मैं सरख़ुशी ले कर

दिल के दरवाज़े बंद हैं सब के
हम कहाँ जाएँ दोस्ती ले कर

दिन तो गुज़रा किसी तरह 'बेताब'
रात आई है बेकली ले कर