उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri udasi ka naqsh-e-pa hai udas lafzon ka ek jangal

मिरी उदासी का नक़्श-ए-पा है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल

مری اداسی کا نقش پا ہے اداس لفظوں کا ایک جنگل

शायर: Tahir Hanfi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी उदासी का नक़्श-ए-पा है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल
ये ग़म की रातों को जानता है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल

किसी की आँखों में धीरे धीरे उतर रहा है नमी का बादल
क़लम से किस के निकल रहा है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल

शिकस्ता काग़ज़ पर आँसुओं का बना हुआ है जो एक तालाब
वो मेरी आँखों से बह रहा है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल

उठाई कल रात डायरी और मैं ने कर डाली नज़्र-ए-आतिश
सो साथ उस के ही जल गया है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल

कि दिल में जितनी अज़िय्यतें थीं क़लम से 'ताहिर' उन्हें लिखा है
ग़ज़ल की सूरत में ढल चुका है उदास लफ़्ज़ों का एक जंगल