उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri taraf se ye be-KHayali na jaane un ko KHayal kya hai

मिरी तरफ़ से ये बे-ख़याली न जाने उन को ख़याल क्या है

مری طرف سے یہ بے خیالی نہ جانے ان کو خیال کیا ہے

शायर: Jaleel Manikpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी तरफ़ से ये बे-ख़याली न जाने उन को ख़याल क्या है
कभी न पूछा मलाल क्या है कभी न देखा कि हाल क्या है

मुबारक अग़्यार से त'अल्लुक़ नई है चाहत नया तअश्शुक़
बला से हम हो गए तसद्दुक़ तुम्हें अब इस का मलाल क्या है

तुझी को जाना तुझी को माना तुझी प दी जान ग़ाएबाना
छुपा नहीं कुछ मिरा फ़साना ये अब जवाब-ओ-सवाल क्या है

विसाल हो या रहे जुदाई तुम्हारी ऐ जान जैसी मर्ज़ी
जो अपनी हालत थी मैं ने कह दी अब आगे मेरी मजाल क्या है

नज़र उठाएँ जो आरसी से तो उन से पूछूँ ये मैं हँसी से
लगाई है आँख क्या किसी से कहो तो ये देख-भाल क्या है

दर-ए-मोहब्बत का इक गदा हूँ परी का तालिब न हूर का हूँ
तुझी को तुझ से मैं चाहता हूँ बस और मेरा सवाल क्या है

कहाँ तक ऐ वा'इज़ो ये झगड़े मज़े उठाने दो बे-ख़ुदी के
जो होश में हूँ तो मैं ये समझूँ हराम क्या है हलाल क्या है

बस अब मोहब्बत से हाथ उठाओ भले को कहते हैं मान जाओ
न आप को इस तरह मिटाओ 'जलील' देखो तो हाल क्या है