उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere sath chalte-chalte ye kahan Thahar gae tum

मिरे साथ चलते-चलते ये कहाँ ठहर गए तुम

مرے ساتھ چلتے چلتے یہ کہاں ٹھہر گئے تم

शायर: Qaisarul Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे साथ चलते-चलते ये कहाँ ठहर गए तुम
शब-ए-ग़म कटेगी कैसे जो अभी से डर गए तुम

वहाँ शम' क्या जलेगी जहाँ बुझ गए मरासिम
वहाँ चाँद क्या करेगा जहाँ शाम कर गए तुम

मिरे सामने पड़ा है अभी आँसुओं का दरिया
मिरे साथ पानियों में ये कहाँ उतर गए तुम

जहाँ दफ़्न है मोहब्बत बड़ी बे-वफ़ा जगह थी
न कभी उधर गए हम न कभी उधर गए तुम

कभी आ के देख जाओ मिरी महवियत का 'आलम
वही दर्द चुन रहा हूँ जो बिखेर कर गए तुम