उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere nuqush tere zehn se miTa dega

मिरे नुक़ूश तिरे ज़ेहन से मिटा देगा

مرے نقوش ترے ذہن سے مٹا دے گا

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे नुक़ूश तिरे ज़ेहन से मिटा देगा
मिरा सफ़र ही मिरे फ़ासले बढ़ा देगा

अँधेरी रात है इस तुंद-ख़ू से मत कहना
वो रौशनी के लिए अपना घर जला देगा

मैं उस का सब से हूँ प्यारा मगर बिछड़ते ही
वो सब को याद करेगा मुझे भुला देगा

बना हुआ हूँ मैं मुजरिम बग़ैर जुर्म किए
अब और क्या मिरा मुंसिफ़ मुझे सज़ा देगा

उगाया जिस ने है बंजर ज़मीं में तुझ को 'नसीम'
है क्या बईद कि वो फूल भी खिला देगा