उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere KHuda meri qaid-e-hayat kam kar de

मिरे ख़ुदा मिरी क़ैद-ए-हयात कम कर दे

مرے خدا مری قید حیات کم کر دے

शायर: Qaisarul Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ख़ुदा मिरी क़ैद-ए-हयात कम कर दे
चराग़ दे नहीं सकता तो रात कम कर दे

सभी तो मेरी तरह हौसला नहीं रखते
सुतून-ए-दार को दो-चार हाथ कम कर दे

मिरे वजूद की क़ीमत अगर परखनी है
ये काएनात उठा मेरी ज़ात कम कर दे

मैं आदमी के क़सीदे को बंद करता हूँ
ज़रा सा तू भी फ़रिश्तों की बात कम कर दे

तिरे ख़ुलूस-ए-मुसलसल से जी न भर जाए
कभी कभी निगह-ए-इल्तिफ़ात कम कर दे

ये रोज़-रोज़ नई कर्बलाएँ कैसी हैं
मिरी ज़मीन से दाग़-ए-फ़ुरात कम कर दे