उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere hath mein ishq ka saz de kar

मिरे हाथ में इश्क़ का साज़ दे कर

مرے ہاتھ میں عشق کا ساز دے کر

शायर: Qaisarul Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे हाथ में इश्क़ का साज़ दे कर
तुम्हीं छुप गए एक आवाज़ दे कर

ये क्यों कर दिया पत्थरों के हवाले
मुझे फ़ितरत-ए-आइना-साज़ दे कर

ये किस ने उठा कर क़लम रख दिया है
कहानी को इक हर्फ़-ए-आग़ाज़ दे कर

हवा में भटकते फिरें अब परिंदे
ज़मीं हट गई ज़ो'म-ए-परवाज़ दे कर

सफ़र पर निकलना है जिस को वो जागे
ठहरता नहीं वक़्त आवाज़ दे कर

ग़ज़ल सादा काग़ज़ पे आँसू लिखेगी
चला जाऊँगा अपना अंदाज़ दे कर

न जाने कहाँ उड़ गई उम्र 'क़ैसर'
खड़ा हूँ बयाबाँ में आवाज़ दे कर