उर्दू शायरी · ग़ज़ल

milte hi bebak thi wo aankh sharmai hui

मिलते ही बेबाक थी वो आँख शर्माई हुई

ملتے ہی بے باک تھی وہ آنکھ شرمائی ہوئی

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिलते ही बेबाक थी वो आँख शर्माई हुई
फिर गई पछता के पलकों तक हया आई हुई

हर अदा मस्ताना सर से पाँव तक छाई हुई
उफ़ तिरी काफ़िर जवानी जोश पर आई हुई

मुझ को ये दा'वा कोई तेरे सिवा दिल में नहीं
उस का ये इल्ज़ाम अच्छी क़ैद-ए-तन्हाई हुई

भोले बन कर उन के मुँह से सुन लिया हाल-ए-रक़ीब
उम्र-भर में एक ही तो हम से दानाई हुई

बोसा ले कर जान डाली ग़ैर की तस्वीर में
ये नया ए'जाज़ ये अच्छी मसीहाई हुई

देख कर क़ातिल की आमद 'दाग़' दिल में शाद शाद
और ग़म-ख़्वारों के मुँह पर मुर्दनी छाई हुई