उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere rone par jo roya aadmi fahmida hai

मेरे रोने पर जो रोया आदमी फ़हमीदा है

میرے رونے پر جو رویا آدمی فہمیدہ ہے

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे रोने पर जो रोया आदमी फ़हमीदा है
नासेह-ए-आक़िल पुराना गुर्ग-ए-बाराँ-दीदा है

मैं भी तो देखूँ निकलता है ये तिनका किस तरह
चारागर की आँख में मेरा तन-ए-काहीदा है

तू ने रक्खा है रक़ीब-ए-तुर्श-रू के दिल पे हाथ
आज क्यों फीका तिरा दस्त-ए-हिना-मालीदा है

ख़ाक में उस ने मिलाया मुझ को या मैं ने उसे
आज मैं हूँ और ये मेरा दिल-ए-तफ़्तीदा है

ज़ह्र खा कर मिल गए हैं ख़ाक में आशिक़ बहुत
उँगलियाँ हैं देख तो या सब्ज़ा-ए-रोईदा है

ख़ूब आता है लगा लेना निगाह-ए-यार को
एक से अन-बन हुई तो दूसरा गिरवीदा है

बहर-ए-नज़्ज़ारा चला है कूचा-ए-क़ातिल में 'दाग़'
किस बला का है कलेजा किस ग़ज़ब का दीदा है