उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere gham ka asar zara na hua

मेरे ग़म का असर ज़रा न हुआ

میرے غم کا اثر ذرا نہ ہوا

शायर: Panna Lal Noor7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे ग़म का असर ज़रा न हुआ
ये तो पत्थर हुआ ख़ुदा न हुआ

देख लो आज आ के बिस्मिल को
कौन जाने ये कल हुआ न हुआ

तर्क-ए-उल्फ़त का एक ही ग़म है
ये इरादा भी देर-पा न हुआ

तिरछी चितवन उतर गई दिल में
तीर कज था मगर ख़ता न हुआ

जज़्बा-ए-शौक़ हो गया दुश्मन
मुझ से इज़हार-ए-मुद्दआ न हुआ

वक़्फ़-ए-गर्दिश हूँ सूरत-ए-परकार
दूर मरकज़ का फ़ासला न हुआ

लौह-ए-हस्ती से क्यों मिटाते हो
मैं कभी हर्फ़-ए-मुद्दआ' न हुआ