उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mehrban ho ke jab milenge aap

मेहरबाँ हो के जब मिलेंगे आप

مہرباں ہو کے جب ملیں گے آپ

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेहरबाँ हो के जब मिलेंगे आप
जो न मिलते थे सब मिलेंगे आप

दम-ए-रुख़्सत ये छेड़ तो देखो
मुझ से कहते हैं कब मिलेंगे आप

आप क्यों ख़ाक में मिलाते हैं
हम मुसीबत-तलब मिलेंगे आप

कारवाँ की तलाश क्या ऐ दिल
आ के मंज़िल पे सब मिलेंगे आप

एक तो वा'दा और उस पे क़सम
ये यक़ीं है कि अब मिलेंगे आप

'दाग़' इक आदमी है गर्मा-गर्म
ख़ुश बहुत होंगे जब मिलेंगे आप