उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maze lun dard ke main thoDe thoDe zulm sah-sah kar

मज़े लूँ दर्द के मैं थोड़े थोड़े ज़ुल्म सह-सह कर

مزے لوں درد کے میں تھوڑے تھوڑے ظلم سہ سہ کر

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मज़े लूँ दर्द के मैं थोड़े थोड़े ज़ुल्म सह-सह कर
सितम कीजे तो थम थम कर जफ़ा कीजे तो रह-रह कर

मिले थे आज मुद्दत में बहुत रोए बहुत तड़पे
वो दर्द-ए-इश्क़ सुन सुन कर हम अपना दर्द कह-कह कर

हुई है शम-ए-महफ़िल तो शरीक-ए-गिर्या-ए-आशिक़
तुझे ऐ क़ुलक़ुल-ए-मीना कहा था किस ने क़ह-क़ह कर

छुपाया ज़ुल्फ़ ने चेहरा तो शोख़ी ने किया ज़ाहिर
हज़ारों बार निकला वस्ल की शब चाँद गह-गह कर

तड़पने में मज़ा आता है उस कम-बख़्त के हम को
अगर दिल यास से बैठा उभारा हम ने कह-कह कर

ये जाना था न आएँगे तो क्यों जाने दिया उन को
यही ऐ 'दाग़' पछतावा मुझे आता है रह-रह कर