उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maut har lamha intizar mein hai

मौत हर लम्हा इंतिज़ार में है

موت ہر لمحہ انتظار میں ہے

शायर: Ejaz Ansari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौत हर लम्हा इंतिज़ार में है
ज़िंदगी आज भी उधार में है

सारी दुनिया से दुश्मनी ले ली
कितनी जुरअत हमारे प्यार में है

शाख़-दर-शाख़ एक उदासी सी
और ये ज़ुल्म भी बहार में है

रहबरों के 'अमल में कुछ भी नहीं
जो भी ना'रा है इश्तिहार में है

तू ने बख़्शा ये मर्तबा ये मक़ाम
वर्ना 'ए'जाज़' किस शुमार में है