उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maut aai aane dijiye parwa na kijiye

मौत आई आने दीजिए पर्वा न कीजिए

موت آئی آنے دیجیے پروا نہ کیجیے

शायर: Yagana Changezi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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मौत आई आने दीजिए पर्वा न कीजिए
मंज़िल है ख़त्म सज्दा-ए-शुकराना कीजिए

ज़िन्हार तर्क-ए-लज़्ज़त-ए-ईज़ा न कीजिए
हरगिज़ गुनाह-ए-इश्क़ से तौबा न कीजिए

ना-आश्ना-ए-हुस्न को क्या ए'तिबार-ए-इश्क़
अंधों के आगे बैठ के रोया न कीजिए

ताकि ख़बर भी लाइए साहिल के शौक़ में
कोशिश ब-क़द्र-ए-हिम्मत-ए-मर्दाना कीजिए

वो दिन गए कि दिल को हवस थी गुनाह की
यादश-ब-ख़ैर ज़िक्र अब उस का न कीजिए

सावन में ख़ाक उड़ती है दिल है रुँधा हुआ
जी चाहता है गिरिया-ए-मस्ताना कीजिए

दीवाना-वार दौड़ के कोई लिपट न जाए
आँखों में आँखें डाल के देखा न कीजिए