उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adab ne dil ke taqaze uThae hain kya kya

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

ادب نے دل کے تقاضے اٹھائے ہیں کیا کیا

शायर: Yagana Changezi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या
हवस ने शौक़ के पहलू दबाए हैं क्या क्या

न जाने सहव-ए-क़लम है कि शाहकार-ए-क़लम
बला-ए-हुस्न ने फ़ित्ने उठाए हैं क्या क्या

निगाह डाल दी जिस पर वो हो गया अंधा
नज़र ने रंग-ए-तसर्रुफ़ दिखाए हैं क्या क्या

इसी फ़रेब ने मारा कि कल है कितनी दूर
इस आज कल में अबस दिन गँवाए हैं क्या क्या

पहाड़ काटने वाले ज़मीं से हार गए
इसी ज़मीन में दरिया समाए हैं क्या क्या

गुज़र के आप से हम आप तक पहुँच तो गए
मगर ख़बर भी है कुछ फेर खाए हैं क्या क्या

बुलंद हो तो खुले तुझ पे ज़ोर पस्ती का
बड़े-बड़ों के क़दम डगमगाए हैं क्या क्या

ख़ुशी में अपने क़दम चूम लूँ तो ज़ेबा है
वो लग़्ज़िशों पे मिरी मुस्कुराए हैं क्या क्या

ख़ुदा ही जाने 'यगाना' मैं कौन हूँ क्या हूँ
ख़ुद अपनी ज़ात पे शक दिल में आए हैं क्या क्या