उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mausam badal sake na tere intizar ke

मौसम बदल सके न तिरे इंतिज़ार के

موسم بدل سکے نہ ترے انتظار کے

शायर: Ghalib Ahmad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौसम बदल सके न तिरे इंतिज़ार के
अब के भी दिन गुज़र गए यूँही बहार के

ग़म-ख़ेज़-ओ-ग़म-शनास मिरी पुर-शिकोह रात
कब आओगी पहाड़ सा ये दिन गुज़ार के

आया हुज़ूर-ए-यार से शाइ'र को ये पयाम
आए शराब-ओ-शेर का चोग़ा उतार के

दिल में तिरे उतर न सकी मेरी कोई बात
लिक्खे हैं लाख शेर ग़ज़ल के सँवार के

एक मुश्त-ए-ख़ाक बन के उड़ा दिल का कारवाँ
दश्त-ए-तलब में अब भी निशाँ हैं ग़ुबार के