उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mast-e-sharab-e-naz par shikwe ka kuchh asar nahin

मस्त-ए-शराब-ए-नाज़ पर शिकवे का कुछ असर नहीं

مست شراب ناز پر شکوے کا کچھ اثر نہیں

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मस्त-ए-शराब-ए-नाज़ पर शिकवे का कुछ असर नहीं
मेरी ख़बर हो क्या उन्हें अपनी जिन्हें ख़बर नहीं

गर्दिश-ए-रोज़गार से ख़ौफ़ मुझे हुआ ही कब
सैल-ए-अलम से बह सके पहलू में वो जिगर नहीं

गोद में हादसात के पल के ही मैं जवाँ हुआ
वो नहीं ज़िंदगी क़ुबूल जिस में कोई ख़तर नहीं

मंज़िल-ए-इश्क़ में मुझे आए तो सख़्त मरहले
बढ़ना नहीं है सहल अगर रुकना भी सहल-तर नहीं

मैं हूँ यहाँ भी बे-क़रार था मैं वहाँ भी बे-क़रार
दिल की दवा उधर न थी दिल की दवा इधर नहीं

घिर के घटा उठी अभी छट भी गई अभी 'हबीब'
मेरी शब-ए-फ़िराक़ की दहर में क्या सहर नहीं