उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maqbul-e-awam ho gaya main

मक़्बूल-ए-अवाम हो गया मैं

مقبول عوام ہو گیا میں

शायर: Zafar Iqbal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मक़्बूल-ए-अवाम हो गया मैं
गोया कि तमाम हो गया मैं

एहसास की आग से गुज़र कर
कुछ और भी ख़ाम हो गया मैं

दीवार-ए-हवा पे लिख गया वो
यूँ नक़्श-ए-दवाम हो गया मैं

पत्थर के पाँव धो रहा था
पानी का पयाम हो गया मैं

उड़ता हुआ 'अक्स देखते ही
फैला हुआ दाम हो गया मैं