उर्दू शायरी · ग़ज़ल

majal kis ki hai ai sitamgar sunae tujhko jo chaar baaten

मजाल किस की है ऐ सितमगर सुनाए तुझ को जो चार बातें

مجال کس کی ہے اے ستم گر سنائے تجھ کو جو چار باتیں

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मजाल किस की है ऐ सितमगर सुनाए तुझ को जो चार बातें
भला किया ए'तिबार तू ने हज़ार मुँह हैं हज़ार बातें

जो कैफ़ियत देखनी है ज़ाहिद तो चल के तू देख मय-कदे में
बहक बहक कर मज़े मज़े की सुनाएँगे बादा-ख़्वार बातें

फ़साना-ए-दर्द-ओ-ग़म सुनाया तो बोले वो झूठ बोलता है
सुनी हुई है बहुत कहानी न हम से ऐसी बघार बातें

अभी से है कुछ उदास क़ासिद अभी से है बद-हवास क़ासिद
सँभल सँभल कर समझ समझ कर करेगा क्या बे-क़रार बातें

तुम्हारी तहरीर में है पहलू तुम्हारी तक़रीर में है जादू
फँसे न किस तरह दिल हमारा जहाँ हों ये पेचदार बातें

बुरी बला है ये 'दाग़'-ए-पुर-फ़न तुम इस को हरगिज़ न मुँह लगाना
वगर्ना ढब पर लगा ही लेगा सुनीं अगर उस की चार बातें