उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main yun to hans diya tha safar ke sawal par

मैं यूँ तो हँस दिया था सफ़र के सवाल पर

میں یوں تو ہنس دیا تھا سفر کے سوال پر

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं यूँ तो हँस दिया था सफ़र के सवाल पर
दिल काँपता था ख़ौफ़ के ख़ाली ख़याल पर

कैसी कसी हुई थी कमाँ आब-ओ-रंग की
क्या 'अक्स पड़ रहा था चमकदार ढाल पर

तुक्मे खुले हुए किसी काली क़मीज़ के
बूटे बने हुए किसी बे-रंग शाल पर

बुझती हुई शफ़क़ थी वही सब्ज़ आँख में
जलता हुआ दिया था वही ज़र्द गाल पर

गोया अभी वो ख़ाक की ख़ुशबू में मस्त है
गोया पड़ी नहीं है नज़र उस की जाल पर

ख़ुद भी वो ख़ूब चौकस-ओ-चालाक है 'ज़फ़र'
मुद्दत से आप की है नज़र जिस के माल पर