उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main tumhaara raha raat bhar

मैं तुम्हारा रहा रात भर

میں تمہارا رہا رات بھر

शायर: Aadarsh Dubey14 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं तुम्हारा रहा रात भर
कसमसाता रहा रात भर

तुम ने दिल को जलाया बहुत
मैं बुझाता रहा रात भर

ज़ख़्म उभरे थे तन पर मगर
मैं छुपाता रहा रात भर

जिस के आने की उम्मीद थी
वो सताता रहा रात भर

बस तुम्हें भूलने के लिए
ख़त जलाता रहा रात भर

तुम से मिलना बहुत है कठिन
सो भुलाता रहा रात भर

ख़ैर-मक़्दम को तेरे दिया
जगमगाता रहा रात भर

अश्क पानी नहीं थे मगर
मैं बहाता रहा रात भर

दिल में था एक पक्षी तिरा
छटपटाता रहा रात भर

वो मुझे चाहता था बहुत
मैं बनाता रहा रात भर

मैं ही हूँ तेरा इक हम-सफ़र
ये जताता रहा रात भर

बस तुझे देखने के लिए
कसमसाता रहा रात भर

जिस पे हम को बहुत था यक़ीं
वो रुलाता रहा रात भर

ये तो 'आदर्श' भी ना हुआ
कौन आता रहा रात भर