उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main teri aankh mein rah kar hijab ho jaun

मैं तेरी आँख में रह कर हिजाब हो जाऊँ

میں تیری آنکھ میں رہ کر حجاب ہو جاؤں

शायर: Tahir Hanfi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शीर्षक की यह संग्रह प्रविष्टि 2 है। समान शीर्षक के रिकॉर्ड में पाठ या श्रेय का अंतर है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक संस्करण का दावा न मानें। अन्य संग्रह प्रविष्टि 1

मैं तेरी आँख में रह कर हिजाब हो जाऊँ
तू हर्फ़ हर्फ़ पढ़े वो किताब हो जाऊँ

मिरे सिवा कभी तुझ को लुभा सके न कोई
मैं तेरे वास्ते वो इंतिख़ाब हो जाऊँ

तू आसमान की वुसअ'त में ले के जाए मुझे
मैं तुझ पे फ़ख़्र करूँ आफ़्ताब हो जाऊँ

तू बूँद बूँद से लज़्ज़त कशीद करता रहे
मगर न प्यास बुझे वो शराब हो जाऊँ

वो अपनी नर्म सी पोरों से गर छुए मुझ को
महक महक उठूँ मिस्ल-ए-गुलाब हो जाऊँ

तुम्हारी याद में छोड़ूँ न मय-कशी 'ताहिर'
मुझे है जितना भी होना ख़राब हो जाऊँ