उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main shair hun to kya rota rahunga

मैं शाइ'र हूँ तो क्या रोता रहूँगा

میں شاعر ہوں تو کیا روتا رہوں گا

शायर: G. R. Vashishth5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं शाइ'र हूँ तो क्या रोता रहूँगा
लहू के दाग़ ही धोता रहूँगा

ज़मीं आँखों की हो जाएगी बंजर
मुसलसल ख़्वाब अगर बोता रहूँगा

तेरी ज़ुल्फ़ें नहीं होंगी तो फिर मैं
शजर की छाँव का होता रहूँगा

ये कब सोचा था जब खो जाओगे तुम
जिसे भी पाऊँगा खोता रहूँगा

तेरी आँखें खुलेंगी तब तलक तो
मैं यूँ सो जाऊँगा सोता रहूँगा