उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle ki sahaaron ko tu aadat kar le

इस से पहले कि सहारों को तू आदत कर ले

اس سے پہلے کہ سہاروں کو تو عادت کر لے

शायर: G. R. Vashishth5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले कि सहारों को तू आदत कर ले
दिल बग़ैर उस के सँभलने की भी हिम्मत कर ले

फ़न-ए-यकजाई का माहिर कोई आए तब तक
है कोई जो मिरे टुकड़ों की हिफ़ाज़त कर ले

कितना सादा है तू इस में भी रज़ा चाहता है
मुझ को बर्बाद करेगा है इजाज़त कर ले

नींद ने मान लिया जो मिरी आँखों के ख़िलाफ़
तेरे ख़्वाबों ने कहा था कि बग़ावत कर ले

कितना आसाँ है हुनर आँख की दुश्वारी का
ज़िंदगी भर जिसे रोना हो मोहब्बत कर ले