उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo chahiye tha wo na mila aasman se

जो चाहिए था वो न मिला आसमान से

جو چاہیے تھا وہ نہ ملا آسمان سے

शायर: G. R. Vashishth8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो चाहिए था वो न मिला आसमान से
ठुकरा के लौट आए सितारों को शान से

ये सोच कर के छाँव में बैठा न मैं कभी
टूटे न हौसला तिरा मेरी थकान से

तलवों को चाटने से हर इक काम बन पड़ा
मेहनत न दे सकी वो जो पाया ज़बान से

लेकिन वो ज़ख़्म भर गया दहशत नहीं गई
सब याद आने लगता हैं उस के निशान से

हम से ज़रा सा आगे अगर हो भी तुम तो क्या
हम अपने आप से बने तुम ख़ानदान से

लौटा जो ख़ाली हाथ तो मैं मुस्कुरा दिया
उम्मीद भी नहीं थी तेरे आस्तान से

ऐ दिल तू राह-ए-'इश्क़ की ठोकर से ले सबक़
जो हो गया सो हो गया आइंदा ध्यान से

सर से भटक रहा है तुम्हारा हर एक लफ़्ज़
दिल क्या सुनेगा जो न सुना जाए कान से