उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dost ban kar aae koi aur gale hans kar lage

दोस्त बन कर आए कोई और गले हँस कर लगे

دوست بن کر آئے کوئی اور گلے ہنس کر لگے

शायर: G. R. Vashishth6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दोस्त बन कर आए कोई और गले हँस कर लगे
एक 'अर्सा हो गया है पीठ में ख़ंजर लगे

किस क़दर बेचैन रहता हूँ कि मुझ बीमार को
दूर से आता हुआ हर शख़्स चारागर लगे

एक मुद्दत का मैं जागा इस भरम में सो गया
क्या पता मुझ को ये दुनिया ख़्वाब में बेहतर लगे

क़ब्ल तो मेरा ये रोना था कोई नज़दीक हो
अब ये 'आलम है कि मुझ को महफ़िलों से डर लगे

इतने चेहरे आँख से गुज़रे हैं उस की खोज में
'ऐन मुमकिन है मिरा हो जाए तो दीगर लगे

अब तो मुझ को रंग ही भाते नहीं तब तो तेरी
ज़ुल्फ़ के साए धनक के रंगों से बढ़ कर लगे