उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main sar-e-dar muskuraati rahi

मैं सर-ए-दार मुस्कुराती रही

میں سر دار مسکراتی رہی

शायर: Sabeen Yunus6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं सर-ए-दार मुस्कुराती रही
ज़िंदगानी सज़ा बढ़ाती रही

सब्र को मेरे बे-हिसी जाना
हौसले और आज़माती रही

आबला-पाई से हुआ सैराब
फूल सहरा में मैं खिलाती रही

दिल की तीरा-शबी मिटाने को
ज़ख़्म सीने के मैं जलाती रही

ख़ुद का शायद कभी गुज़र हो यहाँ
ख़ार रस्ते से मैं हटाती रही

मैं जो तन्हाइयों से डरती थी
इक बयाबाँ में घर बनाती रही