उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main sans le nahin sakta hawa rukawaT hai

मैं साँस ले नहीं सकता हवा रुकावट है

میں سانس لے نہیں سکتا ہوا رکاوٹ ہے

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं साँस ले नहीं सकता हवा रुकावट है
रुका हुआ हूँ कि ख़ुद रास्ता रुकावट है

अभी हमारी मुलाक़ात हो नहीं सकती
कि पहले ख़ल्क़ थी और अब ख़ुदा रुकावट है

मैं किस तरह से भला हो सकूँगा सेहत-मंद
दवा तो थी ही मगर अब दु'आ रुकावट है

करें भी क्या कि इशारा ही इतना मुबहम था
ख़बर नहीं ये इजाज़त है या रुकावट है

हमारा काम है और दोस्तों का लुत्फ़-ओ-करम
कि एक है तो कभी दूसरा रुकावट है

'उबूर कर के ही इस को जवाब दूँगा 'ज़फ़र'
अभी बता नहीं सकता हूँ क्या रुकावट है