उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maine socha hi nahin mar ke kidhar jaunga

मैं ने सोचा ही नहीं मर के किधर जाऊँगा

میں نے سوچا ہی نہیں مر کے کدھر جاؤں گا

शायर: Panna Lal Noor5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ने सोचा ही नहीं मर के किधर जाऊँगा
मैं तो मानिंद-ए-सबा याँ से गुज़र जाऊँगा

सैर-ए-गुलशन का ये अंजाम कहाँ सोचा था
ले के इस बज़्म से इक ज़ख़्म-ए-जिगर जाऊँगा

जब से मानूस तिरे ग़म से हुआ हूँ ऐ दोस्त
ऐसा लगता है कि हर ग़म से गुज़र जाऊँगा

हुस्न की आँच न दो इश्क़ ज़दा दिल को मिरे
नक़्श-ए-पोशीदा की मानिंद उभर जाऊँगा

ये न भूलें मिरी हस्ती को मिटाने वाले
मेरी फ़ितरत है सँवरना मैं सँवर जाऊँगा