उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maine kuchh ashaar junhi aaine par dam kiye

मैं ने कुछ अशआ'र जूँही आइने पर दम किए

میں نے کچھ اشعار جوں ہی آئنے پر دم کیے

शायर: Qamar Aasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ने कुछ अशआ'र जूँही आइने पर दम किए
अक्स तेरा ला दिखाया उस ने सर को ख़म किए

की समाअ'त की तवाज़ो' इस मधुर आवाज़ से
रिज़्क़-ए-बीनाई उसी पैकर के ज़ेर-ओ-बम किए

मुहर होंटों से लगाई इस ज़मीन-ए-हुस्न पर
अपने क़ब्ज़े इस ज़मीं पर और मुस्तहकम किए

जान डाली तज़्किरा-ए-यार से अल्फ़ाज़ में
सीधे-सादे शे'र उस के ज़िक्र से मुबहम किए

रात गुज़री मख़मली हाथों के तकिए पर मिरी
शुक्र है मौला मयस्सर तू ने ये रेशम किए

सुब्ह-ए-वस्ल उस की चहक से गूँज उट्ठे बाम-ओ-दर
बोलती थी पहले जो आवाज़ को मद्धम किए

बह रहा था लम्स का दरिया गुज़शता शब 'क़मर'
ख़ूब हम ने भी मसाम-ए-जिस्म उस से नम किए