उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chanda bhi bas raat mein achchha lagta hai

चंदा भी बस रात में अच्छा लगता है

چندا بھی بس رات میں اچھا لگتا ہے

शायर: Qamar Aasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चंदा भी बस रात में अच्छा लगता है
हर बंदा औक़ात में अच्छा लगता है

चेहरा लाल गुलाबी सा हो जाता है
वो मुझ को जज़्बात में अच्छा लगता है

मिल कर छेड़ते रहते हैं सब यार मुझे
ज़िक्र तिरा हर बात में अच्छा लगता है

सजते हैं उस शोख़ बदन पर सारे रंग
हर कंगन उस हाथ में अच्छा लगता है

अच्छा लगता है वो जैसे गुल-ए-गुलाब
फूलों की बोहतात में अच्छा लगता है

याद गए लम्हों को कर के रो लेना
मुझ को हर बरसात में अच्छा लगता है

छोड़ दे 'आसी' प्यार को चल मज़दूरी कर
इश्क़ अच्छे हालात में अच्छा लगता है