उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn walon ka sar-e-sahil nazara hai ki nain

हुस्न वालों का सर-ए-साहिल नज़ारा है कि नइं

حسن والوں کا سر ساحل نظارہ ہے کہ نئیں

शायर: Qamar Aasi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न वालों का सर-ए-साहिल नज़ारा है कि नइं
डूबने वाले को तिनके का सहारा है कि नइं

जब कि हम दोनों ने बाँग-ए-दिल पे आमन्ना कहा
हाल है अब जो हमारा वो तुम्हारा है कि नइं

फ़ाएदे से मुझ को ज़्यादा फ़िक्र है नुक़सान की
मुख़्लिसी के काम में कोई ख़सारा है कि नइं

मेरी सेह्हत हो गई बेहतर तुम्हारे इश्क़ में
तुम को भी कार-ए-मोहब्बत ने सँवारा है कि नइं

उन को देखा देखते ही हम शनावर हो गए
बहर-ए-उल्फ़त का ख़ुदा जाने किनारा है कि नइं

ये जबीं रुख़्सार आँखें लब हमारे हैं मगर
ये बताओ दिल तुम्हारा भी हमारा है कि नइं