उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dushman se ittihad ke chakkar mein paD gaya

दुश्मन से इत्तिहाद के चक्कर में पड़ गया

دشمن سے اتحاد کے چکر میں پڑ گیا

शायर: Qamar Aasi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुश्मन से इत्तिहाद के चक्कर में पड़ गया
हर दोस्त अब मफ़ाद के चक्कर में पड़ गया

थोड़ी जगह मिली जो किसी काख़-ए-हुस्न में
दिल सारी जाइदाद के चक्कर में पड़ गया

इक हुस्न-ए-शानदार पे कामिल ग़ज़ल के बा'द
शा'इर नए मवाद के चक्कर में पड़ गया

यकसानियत छलकने लगी उस के शे'र से
जो शख़्स इन्फ़िराद के चक्कर में पड़ गया

पट्टी त'अस्सुबात की बाँधी जो ग़ैर ने
अपनों से ही जिहाद के चक्कर में पड़ गया

अच्छे सुख़न का लुत्फ़ नहीं ले सका 'क़मर'
नक़्क़ाद जब 'इनाद के चक्कर में पड़ गया