उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main kar na paya zabt zi-bas chiKHta raha

मैं कर न पाया ज़ब्त ज़ि-बस चीख़ता रहा

میں کر نہ پایا ضبط زبس چیختا رہا

शायर: Faisal Imtiyaz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं कर न पाया ज़ब्त ज़ि-बस चीख़ता रहा
जब आई मुझ को याद क़फ़स चीख़ता रहा

आज़ादियों का चर्चा सर-ए-आसमान था
और एक पंछी ज़ेर-ए-क़फ़स चीख़ता रहा

क़तरा भी तेरे होंटों से मुझ को नहीं मिला
मैं प्यास प्यास प्यास ही बस चीख़ता रहा

है 'उम्र मेरी बीस बरस और उस में से
लग-भग मैं बारह तेरह बरस चीख़ता रहा

दहशत में पड़ गया मलक-उल-मौत देख कर
फिर उस ने काटी तार-ए-नफ़स चीख़ता रहा

फ़ैसल जो पाक साफ़ थे आज़ाद हो गए
मैं था असीर-ए-हिर्स-ओ-हवस चीख़ता रहा