उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aalam ranj-o-alam hai KHair ho

आलम रंज-ओ-अलम है ख़ैर हो

عالم رنج و الم ہے خیر ہو

शायर: Faisal Imtiyaz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आलम रंज-ओ-अलम है ख़ैर हो
या ख़ुदा कैसा सितम है ख़ैर हो

अश्क तेरे झूटे हैं लेकिन मुझे
ए'तिबार-ए-चश्म-ए-नम है ख़ैर हो

देख कर तुझ को कहा महताब ने
क्या अदा क्या पेच-ओ-ख़म है ख़ैर हो

मिल गया मुझ को पता मंज़िल का पर
रस्ते में बैतुस-सनम है ख़ैर हो

उस के होंटों को छुआ तो यूँ लगा
चाशनी-ए-ज़हर-ए-ग़म है ख़ैर हो

मैं हूँ ख़स्ता-हाल फ़ैसल क्या करूँ
मेरा दुश्मन ताज़ा-दम है ख़ैर हो