उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan le aae mujhko main kahan tha

कहाँ ले आए मुझ को मैं कहाँ था

کہاں لے آئے مجھ کو میں کہاں تھا

शायर: Faisal Imtiyaz Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ ले आए मुझ को मैं कहाँ था
किसी मुफ़्लिस का शायद आशियाँ था

नहीं पहचान पाया अहल-ए-दिल को
मुबस्सिर की नज़र में कुछ धुआँ था

निशाँ उल्फ़त का वाहिद ताज ही है
गुज़िश्ता दौर में इक शह-जहाँ था

तिरा आशिक़ तिरा बालम था घायल
तिरी आँखों में ही तीर-ओ-कमाँ था

सनम-ख़ानों में जल्वे इश्क़ के थे
बुतों को तेरे आने का गुमाँ था