उर्दू शायरी · ग़ज़ल

intizar us ka kar bhi sakte ho

इंतिज़ार उस का कर भी सकते हो

انتظار اس کا کر بھی سکتے ہو

शायर: Faisal Imtiyaz Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इंतिज़ार उस का कर भी सकते हो
कर के वा'दा मुकर भी सकते हो

तुम अगर घर में आ नहीं सकते
मेरे घर से गुज़र भी सकते हो

तुम ने पत्थर से दिल लगाया है
आइना हो बिखर भी सकते हो

मुझे हर लम्हा क्यों सताते हो
दुनिया वालो सुधर भी सकते हो

मिलने जाना है तुझ को कल 'फ़ैसल'
आज की शाम मर भी सकते हो