उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jis se dil lagana chahta tha

मैं जिस से दिल लगाना चाहता था

میں جس سے دل لگانا چاہتا تھا

शायर: Kabeer Halati10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जिस से दिल लगाना चाहता था
वो मुझ को बस रुलाना चाहता था

ये उस की भूल थी कुछ और समझा
मैं उस के ग़म उठाना चाहता था

बशर हैवान बन कर रह गया है
ख़ुदा इंसाँ बनाना चाहता था

वो चेहरे पर नया चेहरा लगा कर
मुझे फिर से लुभाना चाहता था

भरोसा कर लिया था मैं ने जिस पर
वो मुझ को आज़माना चाहता था

मिरा जैसे ही आया वक़्त अच्छा
वो फिर से लौट आना चाहता था

नहीं भूका था तेरे जिस्म का मैं
तिरे दिल में ठिकाना चाहता था

तेरे दिल की हर इक धड़कन की ख़ातिर
मैं साँसें हार जाना चाहता था

किसी भी काम का छोड़ा न उस ने
मैं जिस के काम आना चाहता था

किसी ने भर दिए आँखों में आँसू
कबीरा मुस्कुराना चाहता था