उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jab tawahhumat se yaksar guzar gaya

मैं जब तवहहुमात से यकसर गुज़र गया

میں جب توہمات سے یکسر گزر گیا

शायर: Daood Kaashmiri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जब तवहहुमात से यकसर गुज़र गया
अपनी ही शक्ल देख के क्यों आज डर गया

कल तक जो शोर करते थे ख़ामोश हो गए
शायद कि शहर में कोई दीवाना मर गया

बे-अक्स आइना तो किसी काम का न था
पथराव क्यों हुआ कि वो टूटा बिखर गया

राहों ने आँखें मूँद लीं अनजाने ख़ौफ़ से
इक हादसे को साथ लिए वो जिधर गया

हैरान हूँ कि दूर से आया था मेरे साथ
अपनी कहानी कह के न जाने किधर गया