उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main haalat kya kahun dard-e-nihan ki

मैं हालत क्या कहूँ दर्द-ए-निहाँ की

میں حالت کیا کہوں درد نہاں کی

शायर: Jaleel Qidwai11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं हालत क्या कहूँ दर्द-ए-निहाँ की
अयाँ को कुछ नहीं हाजत बयाँ की

मिरी सूरत से ज़ाहिर है मिरा हाल
ज़रूरत क्या मुझे शरह-ओ-बयाँ की

ज़बाँ क़ासिर है अर्ज़-ए-हाल-ए-दिल से
ज़रूरत है इसे इक तर्जुमाँ की

समझने पर अगर हो कोई माइल
ख़मोशी भी है इक सूरत बयाँ की

जफ़ा की क्या शिकायत हो कि ऐ दिल
जफ़ा आदत है मेरे मेहरबाँ की

जो समझे शुक्र को भी इक शिकायत
शिकायत क्या हो ऐसे बद-गुमाँ की

नहीं जिस को ख़बर अपनी भी उस को
ख़बर क्या हो मिरे दर्द-ए-निहाँ की

हसीनान-ए-जहाँ देखे हैं मैं ने
हैं सब नाकाम शक्लें उस जवाँ की

किया था मैं ने कब उल्फ़त का दा'वा
ज़रूरत क्या थी मेरे इम्तिहाँ की

मिली क़ैद-ए-क़फ़स के बा'द कोई
ख़बर मुझ को न मेरे आशियाँ की

जज़ाक-अल्लह 'जलील' अच्छी ग़ज़ल है
भला क्या बात इस हुस्न-ए-बयाँ की