उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main bhi dekhun aaina dena mujhe

मैं भी देखूँ आइना देना मुझे

میں بھی دیکھوں آئنہ دینا مجھے

शायर: Sabiha Sumbul7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं भी देखूँ आइना देना मुझे
कह रहे हैं लोग बे-चेहरा मुझे

मैं कि ठहरी इक हक़ीक़त-आश्ना
ऐसे वैसे ख़्वाब मत दिखला मुझे

आप भी दुनिया के साथी बन गए
आप ने भी ख़ूब पहचाना मुझे

लुत्फ़ अब देने लगी आवारगी
जुस्तुजू अब हश्र तक भटका मुझे

संग-बारी ग़ैर के हाथों में थी
कोई पत्थर किस तरह छूता मुझे

मेरा चेहरा धुँद के पर्दे में था
देख कर भी वो न पहचाना मुझे

मैं ने 'सुम्बुल' सच को बस सच ही कहा
फिर भी सब ने क्यों ग़लत जाना मुझे