उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main bach saka na bachaya gaya hawa se mujhe

मैं बच सका न बचाया गया हवा से मुझे

میں بچ سکا نہ بچایا گیا ہوا سے مجھے

शायर: Usman Habib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं बच सका न बचाया गया हवा से मुझे
गिले हैं मुझ से ख़ुदा को तो हैं ख़ुदा से मुझे

है किस का दस्त-ए-ख़जिल जो सरापा खींचता है
ये कौन देखता है दर्ज़-ए-नीम-वा से मुझे

वो हिज्र-ज़ाद है ऐसा कि मैं मिलूँ न मिलूँ
तराश लेता है अपनी किसी क़बा से मुझे

मैं आप अपना ही ने’मुल-बदल तराशता हूँ
निकाले कौन त'अज्जुब की इब्तिला से मुझे

उसे पता है कि मैं उस को देखता हूँ 'हबीब'
वो शख़्स देखे न देखे मिरी बला से मुझे