उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ka iblagh ba-ehsas-e-tarab chahti hai

ग़म का इबलाग़ ब-एहसास-ए-तरब चाहती है

غم کا ابلاغ بہ احساس طرب چاہتی ہے

शायर: Usman Habib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म का इबलाग़ ब-एहसास-ए-तरब चाहती है
बात वो है कि अदा होने को ढब चाहती है

एक तो पास मिरे दिरहम-ओ-दीं कुछ भी नहीं
दूसरा शूमी-ए-क़िस्मत कि वो सब चाहती है

मैं कि हूँ मौसम-ए-गुल हुज्जत-ए-ज़ंजीर-ब-पा
वो तो ख़ुशबू है चली आती है जब चाहती है

किस के आँसू हैं जो आँखों की रसद चाहते हैं
बात सी जी में ये किस के है जो लब चाहती है

मैं भटक कर भी तिरे ख़्वाब में आया न कभी
और क्या मुझ से तिरी ख़ल्वत-ए-शब चाहती है

मैं न कहता था कि इतना न करा कस्ब-ए-जुनूँ
तुझे रोने को भी अब आँख सबब चाहती है