उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kanar-e-agahi saya hai ya pari koi hai

कनार-ए-आगही साया है या परी कोई है

کنار آگہی سایہ ہے یا پری کوئی ہے

शायर: Usman Habib4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कनार-ए-आगही साया है या परी कोई है
पर उस को देखने वाला यहाँ कोई कोई है

ब-'ऐन-ए-रंग-ए-मसर्रत सर-ए-'इलाक़ा-ए-जाँ
कभी कभी नहीं कोई कभी कभी कोई है

मैं सर उठाया तो पी जा चुकी थी ताक से सब
करूँ भी क्या मैं अगर अब रही-सही कोई है

मैं पानियों पे लिखा शब्द था मगर 'उस्मान'
गुमाँ था मुझ में भी ख़ू-ए-पयंबरी कोई है