उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mach jaega kohram jo sarkar giregi

मच जाएगा कोहराम जो सरकार गिरेगी

مچ جائے گا کہرام جو سرکار گرے گی

शायर: Faheem Zia6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मच जाएगा कोहराम जो सरकार गिरेगी
मत सोच कि चुप-चाप ये दीवार गिरेगी

करता है सर-ए-बज़्म तू हर शख़्स की तौहीन
दस्तार तिरी भी सर-ए-बाज़ार गिरेगी

ख़ुद-ग़र्ज़ी के गारे से जो दीवार-ए-त'अल्लुक़
जब जब भी उठाओगे वो हर बार गिरेगी

इस बार भी पेड़ों पे बहुत बौर लगा है
इस बार भी बिजली सर-ए-अश्जार गिरेगी

हम बैठ गए साया-ए-दीवार में लेकिन
जब आँधी चली रेत की दीवार गिरेगी

ता'ज़ीम को तुम बा'इस-ए-ज़िल्लत न बनाओ
झुक जाओगे क़दमों में तो दस्तार गिरेगी