उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log parae ho jate hain

लोग पराए हो जाते हैं

لوگ پرائے ہو جاتے ہیں

शायर: Ehsaan Sabz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग पराए हो जाते हैं
नहीं पलटते जो जाते हैं

काम नहीं तो सोचा मैं ने
गली से उस की हो आते हैं

उस का चेहरा देखने वाले
बस आँखों में खो जाते हैं

दामन पर गिरते हुए आँसू
दाग़ गुनाह के धो जाते हैं

खौलता पानी तकते बच्चे
रोते रोते सो जाते हैं

वही नहीं तो महफ़िल कैसी
तुम बैठो हम तो जाते हैं