उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahs be-kar kar raha hun main

बहस बे-कार कर रहा हूँ मैं

بحث بے کار کر رہا ہوں میں

शायर: Ehsaan Sabz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहस बे-कार कर रहा हूँ मैं
जब्र नाचार कर रहा हूँ में

दिल धड़कने को अब नहीं राज़ी
दिल को तय्यार कर रहा हूँ मैं

क्यों सज़ा दे नहीं रहे आख़िर
जब कि इक़रार कर रहा हूँ मैं

किस तरह एक सख़्त पत्थर से
देखो तकरार कर रहा हूँ मैं

ख़ुद को अच्छी तरह से देख लिया
ख़ुद से इंकार कर रहा हूँ मैं

जानता हूँ जवाब मैं उस का
फिर भी इसरार कर रहा हूँ मैं

वो जो छुप कर न कर सका कोई
बीच बाज़ार कर रहा हूँ मैं

जो दवा के लिए चले आए
उन को बीमार कर रहा हूँ