उर्दू शायरी · ग़ज़ल

le ke is ghaT se us ghaT gai mera wujud

ले के इस घाट से उस घाट गई मेरा वुजूद

لے کے اس گھاٹ سے اس گھاٹ گئی میرا وجود

शायर: Faiz Khalilabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ले के इस घाट से उस घाट गई मेरा वुजूद
फ़िक्र दीमक की तरह चाट गई मेरा वुजूद

मेरी बर्बादी में इक शाख़ भी शामिल थी मिरी
ख़ुद कुल्हाड़ी तो नहीं काट गई मेरा वुजूद

अपने मे'यार का भी दाम न मिल पाया मुझे
ज़िंदगी ले के कई हाट गई मेरा वुजूद

मैं सिकंदर था मगर आख़िरी मंज़िल की तरफ़
ले के इक टूटी हुई खाट गई मेरा वुजूद

'फ़ैज़' जिस मिट्टी ने तरतीब दिया था मुझ को
एक दिन मिट्टी वही पाट गई मेरा वुजूद