उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu mein tar ye dayar bhi dekhna hai ek din

लहू में तर ये दयार भी देखना है इक दिन

لہو میں تر یہ دیار بھی دیکھنا ہے اک دن

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू में तर ये दयार भी देखना है इक दिन
मुझे तिरा इख़्तियार भी देखना है इक दिन

गुज़रना है एक रास्ते से हवा की सूरत
चराग़ को सोगवार भी देखना है इक दिन

तलाश करनी है अश्क और आईने में निस्बत
किसी की आँखों के पार भी देखना है इक दिन

अभी तो दुनिया की सर्द-मेहरी से लड़ रहा हूँ
सुलूक-ए-परवरदिगार भी देखना है इक दिन

नियाम से तेग़ भी मुझे खींचनी है 'शहज़ाद'
और अपना दिल तार तार भी देखना है इक दिन