उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu mein Duba hua pairahan chamakta hai

लहू में डूबा हुआ पैरहन चमकता है

لہو میں ڈوبا ہوا پیرہن چمکتا ہے

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू में डूबा हुआ पैरहन चमकता है
सुलगती रेत पर इक गुल-बदन चमकता है

सितारे बुझते चले जा रहे हैं ख़ेमों में
बस इक चराग़ सर-ए-अंजुमन चमकता है

ज़ईफ़ चुन तो रहा है जवान लाशों को
मगर निगाह में इक बाँकपन चमकता है

ये कैसे फूल झड़े शीर-ख़ार होंटों से
कि जिन के नूर से सारा चमन चमकता है

ये कौन माह-ए-मुनव्वर असीर है 'शहज़ाद'
ये किस का हल्क़ा-ए-तौक़-ओ-रसन चमकता है